मुंबई में फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश, 22 लोगों से 14.83 लाख रुपये की ठगी, 19 लोगों पर FIR दर्ज

 

मुंबई के बांगुर नगर पुलिस ने एक फर्जी कॉल सेंटर पर छापा मारकर 19 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि आरोपी कूरियर और ई-कॉमर्स कंपनियों की लाइफटाइम फ्रेंचाइजी दिलाने और भारी मुनाफा कमाने का लालच देकर लोगों से लाखों रुपये ठग रहे थे। अब तक 22 लोगों से 14.83 लाख रुपये की ठगी किए जाने का पता चला है।

पुलिस ने 2 सितंबर 2026 को मालाड पश्चिम में नूतन स्कूल के पास मार्वे रोड स्थित एम फिन्स सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड पर छापा मारा। छापेमारी के दौरान पुलिस ने कई पुरुषों और महिलाओं को नागरिकों को फोन करते हुए पकड़ा। आरोप है कि आरोपी मोबाइल फोन और व्हाट्सऐप के जरिए लोगों से संपर्क करते थे। वे दावा करते थे कि उनकी कंपनी के Amazon, Flipkart, Myntra, Blue Dart, DTDC और BigBasket जैसी कंपनियों के साथ करार हैं।

आरोपी लोगों से कहते थे कि यदि वे इन कंपनियों में पैसा निवेश करते हैं तो उन्हें अच्छा रिटर्न और लाइफटाइम फ्रेंचाइजी मिलेगी। इस झांसे में लेकर उनसे पैसे वसूले जाते थे और बाद में उन्हें कथित तौर पर ठग लिया जाता था।

पुलिस की जांच में सामने आया कि सोहनलाल गुप्ता कंपनी का मालिक है। हालांकि, जांच में यह भी पता चला कि कंपनी का केवल एक कंपनी के साथ ही करार था, पुलिस ने बताया।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने 17 टेली-कॉलर्स के मोबाइल फोन, 8 लैपटॉप, एक्सेल शीट और फ्रेंचाइजी समझौतों से जुड़े दस्तावेज जब्त किए। पुलिस को ऐसे लोगों की सूची भी मिली, जिन्होंने फ्रेंचाइजी के लिए पैसे दिए थे। सूची में उनके मोबाइल नंबर, ई-मेल आईडी और भुगतान की गई रकम का विवरण था। इसके अलावा 2.30 लाख रुपये मूल्य का सामान भी जब्त किया गया।

पुलिस ने कुछ ऐसे लोगों से संपर्क किया, जिन्होंने आरोपियों को फ्रेंचाइजी के लिए पैसे दिए थे। उन्होंने बताया कि पैसे देने के बावजूद उन्हें न तो फ्रेंचाइजी मिली और न ही बाद में आरोपियों ने उनके फोन का जवाब दिया। आरोप है कि आरोपियों ने उनकी रकम भी वापस नहीं की।

पुलिस ने संतोष गुप्ता, चिराग शाह, ऐश्वर्या येशु, फातिमा सैयद, कासिम अंसारी, कैफ काजी, राकेश गुप्ता, आरती नाडर, आर्यन अंसारी, रोहित किरेकर, शीतल शर्मा, प्रियंका कुशवाह, आफरीन शेख, मणिकुमार गंदन, सुंदरम झा, मेहक खान, अनिकेत पवार, वंदेश गावड़े और पार्थ राजपूत के खिलाफ FIR दर्ज की है।

मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) यानी धोखाधड़ी कर बेईमानी से किसी व्यक्ति को संपत्ति देने के लिए प्रेरित करने तथा अन्य संबंधित धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत दर्ज किया गया है।

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